क्षार सूत्र थेरेपी (Kshar Sutra Therapy)
क्षार सूत्र धागा निर्माण की प्रामाणिक विधि
क्षार सूत्र एक अत्यंत विशिष्ट विधा है। इसका उपयोग बवासीर (Piles), भगंदर (Fistula), एनल फिशर और पाइलोनिडल साइनस के जड़ से निवारण के लिए किया जाता है।
धागा बनाने की प्रक्रिया (21 Coatings):
क्षार सूत्र निर्माण के लिए सर्जिकल बारबेर थ्रेड (नंबर 20 लिनेन धागा) का उपयोग किया जाता है। इस धागे पर औषधीय द्रव्य तीन अलग-अलग चरणों में चढ़ाए जाते हैं:
- प्रथम 11 लेप (स्नुही क्षीर): औषधीय सेहुंड पौधे के ताजा दूध (Latex of Euphorbia neriifolia) का लेप किया जाता है। यह धागे को कटिंग गुण प्रदान करता है।
- मध्य 7 लेप (अपामार्ग क्षार): स्नुही क्षीर के साथ-साथ अपामार्ग पौधे के क्षार (Alkaline extract of Achyranthes aspera) का लेप चढ़ाया जाता है। यह मरे हुए रेशों व अस्वास्थ्यकर मांस को गलाने का काम करता है।
- अंतिम 3 लेप (हरिद्रा चूर्ण): हल्दी के लेप किए जाते हैं, जो एंटी-सेप्टिक, घाव को सुखाने और दर्द रोधी गुण प्रदान करते हैं।
प्रत्येक लेप चढ़ाने के बाद धागे को विशेष क्षार सूत्र कैबिनेट में सुखाया जाता है। इस प्रकार कुल 21 कोटिंग्स चढ़ने में लगभग 25 से 30 दिनों का समय लगता है। तैयार धागे को पराबैंगनी किरणों (UV rays) की सहायता से स्टेरलाइज किया जाता है।
उपचार उपरांत सावधानियां (Post-op Care)
क्षार सूत्र प्रक्रिया के बाद मरीज को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
इलाज का संक्षिप्त विवरण
क्या आपको फिस्टुला/पाइल्स है?
बिना सर्जरी के 100% स्थायी इलाज के लिए आज ही डॉ. विष्णु दत्त शर्मा से अपनी जांच का समय तय करें।
